एक कवि की डायरी -- मंगलेश डबराल

मंगलेश जी हर बातचीत में यह ज़रूर कहते हैं कि एक कवि को गद्य ज़रूर लिखना चाहिए और यह सुनते हुए मुझे रसूल हमज़ातोव याद आते हैं जिन्होंने लिखा है 'कितनी ही बार मैंने अपने काव्य गगन से नीचे, गद्य के समतल मैदान पर यह ढूँढते हुए नज़र डाली कि कहाँ बैठकर आराम करूँ ... पढ़िए एक कवि की डायरी ...



1 comment:

  1. बहुत सुंदर.. कवि के मन में क्या चलता है.. खुल कर दिख रहा है.. शायद इसी लिए गद्ध लिखने को कहा जाता है ताकि आपके पद्ध में ज्यादा सुलभता आ सके।

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