एक कवि की डायरी -- मंगलेश डबराल

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मंगलेश जी हर बातचीत में यह ज़रूर कहते हैं कि एक कवि को गद्य ज़रूर लिखना चाहिए और यह सुनते हुए मुझे रसूल हमज़ातोव याद आते हैं जिन्होंने लिखा ...

तुम्हारी यादें हरी घास सी हैं - गौरव गुप्ता की कविताएँ

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गौरव गुप्ता नए संभावनाशील कवि हैं जो सहज, सरल शब्दों में अपनी बात कहते हैं और वह मन को छू जाती है। पिछले महीने हुए मुक्तांगन- कविता कोश का...

कविता में स्त्री - कुछ तुम्हारी नज़र, कुछ हमारी

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कोई महिमामंडन नहीं करूंगी , किसी विशेषण , किसी अलंकरण से नहीं सजाऊँगी। स्त्री , तुम मानुषी हो , खुल कर सांस ले पाओ , जी पाओ हर ग...

नटई तक माड़ भात खाने वाली लड़की और बूढ़ा लेखक : युवा कथाकार शिवेंद्र की कहानी

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       मारकेज़ के जादुई यथार्थवाद के बारे में कथाकार प्रियदर्शन अपने एक आलेख मे लिखते हैं , “मारक़ेज़ वह क्या करते हैं कि उनके छूते ही जा...

क्यों नहीं कह सकते - माइ चॉइस? - रश्मि भारद्वाज

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देह मेरी , मेरा दिमाग , मैं चुनूंगी मैं चुनूंगी अपनी पसंद के लिबास तब भी मेरी आत्मा रह सकती है निर्वस्त्र मैं चुनूंगी मे...

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