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नटई तक माड़ भात खाने वाली लड़की और बूढ़ा लेखक : युवा कथाकार शिवेंद्र की कहानी

       मारकेज़ के जादुई यथार्थवाद के बारे में कथाकार प्रियदर्शन अपने एक आलेख मे लिखते हैं , “मारक़ेज़ वह क्या करते हैं कि उनके छूते ही जा...

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क्यों नहीं कह सकते - माइ चॉइस? - रश्मि भारद्वाज

देह मेरी , मेरा दिमाग , मैं चुनूंगी मैं चुनूंगी अपनी पसंद के लिबास तब भी मेरी आत्मा रह सकती है निर्वस्त्र मैं चुनूंगी मे...

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