पूनम विश्वकर्मा वासम की कविताओं में बस्तर की मिट्टी की सुगंध है। आदिवासी जीवन के विविध रंगों से भरी ये कविताएँ अपनी ताज़गी, टटके बिंबों और अलहदा विषयों की वजह से हमारा ध्यान खींचती हैं और स्मृति में बनी रहती हैं। ये कविताएँ जानती हैं कि बस्तर होने का मतलब क्या है, इंद्रावती नदी क्यों चुपके से रोती है और 'नम्बी जलप्रपात' की सबसे ऊंची चोटी से गिरते तेज पानी के धार का अनसुना संगीत हमसे क्या कहता है। हाशिए पर पड़े जीवन को कविता में बुनकर उस कठिन जीवन की चुनौतियाँ और समस्याएँ हमारी आँखों के आगे चित्रित करने में कवि सक्षम हुई हैं।