सौरभ पांडेय की कविताओं का स्वर व्यक्तिपरक है । कविताओं में निजी दुख, प्रेम और विरह का स्वर प्रभावी है लेकिन इनकी ताजगी आकर्षित करती है । अनगढ़ होते हुए भी यहाँ कविता अपनी पूरी संभावना के साथ मौजूद है । बिंबों की सादगी और सहजता पाठकों से संवाद कर पाने में सक्षम होती हैं। अपने आस पास के वातावरण के लिए एक सजग दृष्टि और संवेदना ही कवि का आधार होता है । इस युवा कवि के पास वह संवेदनशील, सजग दृष्टि है जो भविष्य के लिए आशान्वित करती है । आइए पढ़ते हैं सौरभ पांडेय की कविताएँ -